Tuesday, 18 December 2012

देखा था उस दिन . . .



मैंने देखा था उस दिन 
तुम्हारे उस रूप को ;
तुम्हारे चेहरे की चांदनी 
तुम्हारे बदन की धूप को ;
हैरां था मैं देख बहुत
कुदरत के उस बुत को ;
फ़लक पर दिख जाया करो 
ढलते  ही शाम . . ;
ये बात कहता है
"साहिल" सिर्फ आपको . . |

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