Monday, 24 June 2013

एहसास . .






दर्द का एहसास अब कहाँ रहा मुझमे . . .;

जब सुना संग मेरी रहगुज़र के संग मेरे रोये है ,

कोई आवाज़ देकर जगा दे अब मुझको "साहिल"-

पत्थर के इंसानों के बीच हम भी अब तक सोये है |

Tuesday, 1 January 2013

देते हो दुआ . . .



देते हो दुआ मुस्कुराने की मुझको रुलाने के बाद ,
दिखाते हो हंसीन सपने मुझको जगाने के बाद :
न जाने ये कैसा इंतज़ार है "साहिल" -
जो ख़त्म होगा शायद मेरे मर जाने के बाद |