(1)
साहिल की तमन्ना थी उस मुसाफिर की तरह,
जिसे मजिल तो न मिली मगर हमसफ़र मिल गया |
(2)
दरिया के आस पास, रेत पर थे कुछ निशान,
याद दिलाते है किसी की, जो है किसी की पहचान |
(3)
मेरी बरबादियो में ज़िक्र तेरा भी होता है ;
जब कोई मेरी जैसी ही ख़ता करता है,
हूँ, खुशनशीब की मेरा ज़िक्र आज भी-
तेरे नाम के साथ हुआ करता है |
(4)
मौसम भी बदलने में वक्त लिया करते हैं ;
मगर वक्त के बदलने का कोई मौसम नहीं होता,
बीमार का हाल तो पूछने सभी जाते है साहिल-
मगर उसके दर्द का एहसास हर किसी को नही होता |
(5)
तेरी तनहाई को जब किसी का सहारा न मिले
तेरी डूबती किस्ती को जब कोई किनारा न मिले
तब मेरे प्यार को याद करके बहा लेना दो आंसू
चाहे हमारा निशान इस जहाँ में मिले न मिले |
(6)
चाह कर भी कभी - कभी ये कदम बढ़ाये नही जाते
और कुछ ज़ख़्म देखने वालो से छुपाये नही जाते |
(7)
हालत ऐसे भी नही है की,
मै मुस्कुरा भी न सकू,
मेरे दर्द-ए-दिल की तू दावा है -
मगर तेरे पास मै आ भी न सकू |
(8)
तेरे पास चला आया हूँ मै,
ज़रा और मुस्कुराने के लिए,
कुछ ज़ख्म जो अभी हरे है-
उन्हें ज़माने से छुपाने के लिए |
(9)
काश ऐसा कोई सफ़र होता,
की हर मोड़ पर तेरा ही घर होता,
मै मंजिलो की फिर तमन्ना न करता-
अगर तेरे जैसा कोई हमसफ़र होता |
(10)
मेरी बरबादियों पर मुस्कुराने वालों,
तुम बे खबर हो, ये दिल भी हंसा करता था;
विरानो की तमन्ना हमेशा से नहीं थी साहिल को-
आशियाना एक इसका भी यहाँ हुआ करता था |