Sunday, 26 August 2012

जब बर्बाद ही . . .

जब बर्बाद ही करना है ,
तो कुछ इस तरह से बर्बाद कर मुझे ,
की फिर कभी खुद को -
आबाद न कर सकूँ . . . 
और छोड़ जा अपनी बेवफाई का ,
कुछ एसा रंग "साहिल" -
की चाहकर भी अंपनी जिंदगी को ;
बेदाग न कर सकूँ . . . .|

Sunday, 12 August 2012

दिल-ए-ज़ज्बात . . . मुश्किल


दिल-ए-ज़ज्बात      जो   बयाँ   करोगी ,
ज़ुबां   से   तो   होगी     ही     मुश्किल ;
दिल-ए-दर्द     को     दर्द      समझोगी -
तो    सहने   में    होगी    ही  मुश्किल |

जो रहती हो खोयी किसी के तसव्वुर में ,
तो  इन ख्यालो से  से होगी ही मुश्किल ;
जो  तोड़  दो  तुम ये  ख्याल-ए- बंदिश -
तो   सामने    होगा   तुम्हारा    साहिल |

तुम  ये  कहती  हो की  मिलन हमारा , 
है    इस   ज़हां  में   होना    मुश्किल ;
दो कदम जो  बढाओ  तुम  इस तरफ -
तो   कुछ    भी   नही   है     मुश्किल |

इस       प्यार      को   समझाना     है ,
न  इतना   आसन,  न   है   मुश्किल ;
जो     चाहती    हो    इसे    समझना -
तो    मिला    लो    साहिल   से   दिल |

तुम्हारी   कोशिश   है  मुझे भूलने  की ,
ये     काम       बहुत     है      मुश्किल ;
क्योंकि    निगाहे  जो   बंद भी  कर लो -
तो  सामने  होगा  तुम्हारा  ही  साहिल |