आज कल चर्चे अपने भी हुआ करते है
दुश्मनो की महफ़िल में वो भी हुआ करते है |
ज़िक्र जिनका गवारा न करतें थे कभी ,
आज कल उनसे भी हँस कर मिला करते है |
वक्त गुज़रा है जिनका समन्दर के तुफानो में ,
अब तो वो भी "साहिल" पर जाने से डरा करते है |
जो रोज़ ज़िक्र छेड़ा करतें थे अपने ख्वाबों का ,
आज कल वो भी रातो को जाग करते है |
जिनको नाज़ था बड़ा अपने हुसन पर ,
अब तो वो भी चन्दन लगाकर नहाया करते है |
.jpg)
No comments:
Post a Comment