Sunday, 4 March 2012

नारी तुम तो तुम हो ...

कोई समझा न पाया तुम्हे,
तुम रहस्मयी ऐसी वो पहेली हो,
किसी को मिटा दिया -
या मिट गया ;
तुम नर की ऐसी सहेली हो |

यह तो सभी कहती है 
की नारी तो अबला है , गर 
मेरी नज़र से देखो - 
जो उपसर्ग हटा कर , 
नारी तो एक बला है |

इस पृथ्वी पर न जाने 
कितने तुम्हारे रूप है,
सभी ढंग में हर रंग में 
बहुत अच्छे तुम्हारे स्वरूप है | 

दो का आकड़ा भी पड़ता न भरी, 
इनके पैरो में झुकी दुनिया सारी,
नारी तुम तो तुम हो बस तुम;
पहचान न पाया साहिल मगर हो गया गुम |

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